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नेता आरती - "बोलो जय नेता राजा !"

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neta
बोलो जय नेता राजा, बोलो जय नेता राजा !
लोहा, लक्कड़, टीना, जो भी मिले खा जा !
बोलो जय नेता राजा !
.
चमचे तुमको ध्यावें, सुख सम्पति पावें !
ओ बाबू सुख सम्पति पावें………………!
जो तुमको नहीं ध्यावे, कष्ट बहुत पावे !
बोलो जय नेता राजा !
.
महाधूर्त झूठे हो, सब के सब पापी !
ओ भईया सब के सब पापी ………!
पाप तुम्हारा भुगते, जनता अभिशापी !
बोलो जय नेता राजा !
.
तुम यमराज, निशाचर, तुम रिश्वत खाते !
देखो जी तुम रिश्वत खाते ……………….!
घपले – घोटाले का , माल पचा जाते !!
बोलो जय नेता राजा !
.
धन दौलत के कीड़े, तुम सब खल कामी !
ओ नेता तुम सब खल कामी …………..!
कल के चोर-उचक्के, आज बने स्वामी !
बोलो जय नेता राजा !

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
March 11, 2014

बहुत सुन्दर अब इतने से भी दिमाग कि बत्ती न जले तो क्या कहा जाए जय श्री राधेय सुरेन्द्र कुमार शुक्ल भ्रमर५

Rajesh Dubey के द्वारा
March 11, 2014

समयानुकूल कविता, वर्त्तमान लोकतंत्र के चित्र को उकेरती. वधाई.

rameshbajpai के द्वारा
March 11, 2014

प्रिय श्री शशि जी आप को फिर देख कर बहुत अच्छा लगा | कल के चोर -उचक्के , आज बने …….. बहुत सटीक प्रहार | हार्दिक शुभ कामनाओ सहित

jlsingh के द्वारा
March 6, 2014

आदरणीय शशि भूषण जी, सादर अभिववादान! सामयिक आरती के लिए हार्दिक आभार! आरती तो अंत में गयी जाती है सर जी आपने पहले ही गा दिया चलिए यह भी ठीक है….अंत भला तो सब भला …

deepakbijnory के द्वारा
March 6, 2014

आदरणीय शशिभूषण जी एक लम्बे समय बाद आपकी रचना के रसास्वादन का मौका मिला बहुत खूब AARTEE


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