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चोरों की बारात , एक से एक धुरन्धर

Posted On: 3 Oct, 2013 Others में

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न्याय व्यवस्था ने इन्हें दिखला दी औकात,
निकल रही है जेल में, “चोरों की बारात” !
चोरों की बारात , एक से एक धुरन्धर,
अरबों-खरबों गटक गए , अन्दर ही अन्दर !
बहुतों की होने वाली है हालत खस्ता,
सम्मुख बन यमदूत खड़ी है न्याय व्यवस्था !
………………………………
अल्लीबाबा भी गए , चोर गए चालीस,
कहते थे भगवान् हैं, निकले चार सौ बीस !
निकले चार सौ बीस, जेल की रोटी तोड़ें,
वापस संसद में जाने का लालच छोड़ें !
अब तिहाड़ है इन लोगों का काशी-काबा,
वहीँ बैठ भूसा खायेंगे अल्लीबाबा !
………………………………..
वृद्धावस्था में मिली जेल गमन की टीस,
सी० एम० होते थे कभी, अब हैं चार सौ बीस !
अब हैं चार सौ बीस, अकड़ सब झड़ जायेगी,
सब्जी – रोटी – दाल की आदत पड़ जायेगी!
दिला रहे थे पांच रुपये में भोजन सस्ता,
बैठ जेल में काटें अपनी वृद्धावस्था !

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

s.p.singh के द्वारा
October 7, 2013

अति सुन्दर रचना – कृपया http://sohanpalsingh.jagranjunction.com/2013/10/06/%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%8c%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82/#कमेंट्स कृपया इस रचना पर भी ध्यान देवे. धन्यवाद.

jlsingh के द्वारा
October 5, 2013

वाह वाह कविश्रेष्ठ महोदय! आपका भी कोई जवाब नहीं क्या कुण्डलियाँ पहनाई हैं आपने चोरो की बारात को! यहाँ तो अल्ली बाबा से सवाई निकले वहां चालीस थे यहाँ ४५+१(रसीद मसूद).


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