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पलकें बिछा तिहाड़ कर रहा, स्वागत की तैयारी है !!

Posted On: 1 Oct, 2013 Others में

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कल तक था जो माननीय, हो गया आज बेचारा है !
ठूंस-ठूंस कर जिसने गर्दन तक खाया पशुचारा है !!
गद्दी तज, “बैकुंठ” पधारो, आई तेरी बारी है !
पलकें बिछा तिहाड़ कर रहा स्वागत की तैयारी है !!
…………..
लालटेन बुझ गई, अँधेरे ने कईयों को लील लिया !
चली न्याय की छुरी और मोटी चमड़ी को छील दिया !
वार दनादन होने वाला है, ऊपर से – नीचे से !
अभी और कितने लाइन में लगे खड़े हैं पीछे से !
.
जनता ने चुन कर भेजा तो, खुद को खुदा समझ बैठे !
बात न सीधे मुंह करते थे, रहते थे ऐंठे – ऐंठे !
संसद में पिंगल पढ़ते थे, आज हमारी पारी है !
पलकें बिछा तिहाड़ कर रहा स्वागत की तैयारी है !!
……………
विकेट धड़ा धड़ उलट रहे हैं , माननीय बलवानों के !
संसद में क़ानून बनाने वाले इन भगवानों के !
कुछ ही दिन में नया पता इन सबका आनेवाला है !
कारागृह में बहुत जल्द ही, जलवा छाने वाला है !
.
हँसने के दिन गए कायरों, रोने को तैयार रहो !
बहुत सहा है जुल्म, आज तू सब जनता का वार सहो !
चोर – उचक्के सभी वहीँ हैं, जिनसे तेरी यारी है !
पलकें बिछा तिहाड़ कर रहा स्वागत की तैयारी है !!
………………
गद्दी पर जब तक बैठा, तब तक तो भोग लगाता है !
न्यायालय जाने से पहले कठिन रोग हो जाता है !
पाँव कबर में लटके हैं पर हवस न जाती सत्ता की !
तनिक नहीं चिंता ये करते हैं भारत की जनता की !
.
कहीं दवाओं की खरीद में घोटाले ये करवाते !
पैसे लेकर कहीं सीट कालेजों में ये बढ़वाते !
मंत्री बन लूले-लंगड़े-असहायों का पैसा खाते !
नाक नहीं होती तो सब के सब निश्चित मैला खाते !
.
नियति चक्र विकराल हँसी हँस रहा आज नेताओं पर !
तनी हुई है न्यायपालिका की नजरें “आकाओं” पर !
पहले आरक्षण करवा लो, सीट की मारामारी है !
पलकें बिछा तिहाड़ कर रहा स्वागत की तैयारी है !!
…………..
—: दोहा :—
जनता नेता से कहे, तू क्या रौंदे मोय !
एक दिन ऐसा आयेगा, हम रौंदेंगे तोय !!
……….

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
October 4, 2013

एक दम सही बात कही है . आपकी लेखनी को नमन . सुन्दर प्रस्तुति . कभी इधर भी पधारें . सादर मदन

jlsingh के द्वारा
October 1, 2013

बहुत खूब कविश्रेष्ठ! अस्पताल की नहीं जरूरत, कारागार दुरुस्त करो, भाग न पाए कोई कैदी, रक्षक को भी चुस्त करो.

Santlal Karun के द्वारा
October 1, 2013

आदरणीय शशिभूषण जी, आप ने दो-टूक और बेबाक तथ्यों को उजागर करता जनता-जनार्दन का शंखनादी गीत प्रस्तुत किया है; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

deepakbijnory के द्वारा
October 1, 2013

वह बहुत खूब कविराज


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