angaare

Just another weblog

18 Posts

320 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14369 postid : 585237

ये पूरा हिन्दुस्तान बेंच सकते हैं !

  • SocialTwist Tell-a-Friend

दो मन ललाट पर लेप लगा चन्दन का ! मिथ्या आडम्बर करते ईश-भजन का ! परिधान पहन कर गेरुआ इठलाते हैं ! मूर्खों में इनके पद पूजे जाते हैं ! . इनके उर में बस कपट भाव ही मिलता ! करते समाज की नहीं तनिक भी चिंता ! हिन्जड़ों जैसा ये हाव भाव दिखलाते ! बेटी-बेटी कह बलात्कार कर जाते ! . जनता को राह दिखाते सत्कर्मों का ! जो मीठा जहर पिलाते हैं धर्मों का ! ये फ़िल्मी धुन पर भजन किया करते हैं ! नित मद्य-मांस का पथ्य लिया करते हैं ! . साहित्य और संस्कृति से इनका नाता ! रत्ती भर को भी कभी नहीं जुड़ पाता ! जो मंत्र पाठ भी शुद्ध नहीं कर पाते ! हैं अज्ञानी, पर तनिक नहीं शरमाते !! . ये पाखंडी सत्कर्म भला क्या जानें ? ये मूर्ख वेद का मर्म भला क्या जानें ! ये चिकने घट हैं, शर्म भला क्या जानें ? ये रंगे स्यार हैं, धर्म भला क्या जानें ? . कर देख लिखा मस्तक में क्या बतलाते ! कैसे हैं नर के ग्रह - नक्षत्र समझाते ! अपनी विपत्तियाँ नहीं जान पाते हैं ! ये धर्म बेंच कर भीख मांग खाते हैं ! . ये लहू चूसते भोले - भाले नर का ! ले रहे लाभ हैं अपने आडम्बर का ! ये राह स्वर्ग का सबको दिखलाते हैं ! पर स्वयं व्याधि से ग्रस्त हुए जाते हैं ! . ये बैठ मठों में बीज पाप का बोते ! अपने उर के भीतर का कलुष न धोते ! मुख से निशदिन ये राम नाम गाते हैं ! पर नहीं किसी के कभी काम आते हैं ! . ये पूजा का सामन बेंच सकते हैं ! ये माता का परिधान बेंच सकते हैं ! पैसा पाकर ईमान बेंच सकते हैं ! ये पूरा हिन्दुस्तान बेंच सकते हैं ! ---------

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

deepakbijnory के द्वारा
August 28, 2013

दमदार और ओजपूर्ण rachna बधाई

Rajesh Dubey के द्वारा
August 24, 2013

इन्हें देश से सिर्फ धन ही कमाना है. बहुत बढ़िया आपने लिखा है,”ये पूरा हिंदुस्तान बेंच सकते हैं.

के द्वारा
August 23, 2013

आदरणीय शशिभूषण जी, मिथ्या आडम्बर पर आधुनिक, विद्रूप संवेदनाओं को उघाड़ती बारीक गेय कविता; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! … “इनके उर में बस कपट भाव ही मिलता ! करते समाज की नहीं तनिक भी चिंता ! हिन्जड़ों जैसा ये हाव भाव दिखलाते ! बेटी-बेटी कह बलात्कार कर जाते !”


topic of the week



latest from jagran